Monday, August 31, 2015

सकारात्मक सोच

एक  आदमी समुद्रतट पर चल रहा था। उसने देखा कि कुछ दूरी पर एक युवक ने रेत पर झुककर कुछ उठाया और आहिस्ता से उसे पानी में फेंक दिया। उसके नज़दीक पहुँचने पर आदमी ने उससे पूछा – “और भाई, क्या कर रहे हो?”
युवक ने जवाब दिया – “मैं इन मछलियों को समुद्र में फेंक रहा हूँ।”
“लेकिन इन्हें पानी में फेंकने की क्या ज़रूरत है?”- आदमी बोला।

युवक ने कहा – “ज्वार का पानी उतर रहा है और सूरज की गर्मी बढ़ रही है।अगर मैं इन्हें वापस पानी में नहीं फेंकूंगा तो ये मर जाएँगी”।
आदमी ने देखा कि समुद्रतट पर दूर-दूर तक मछलियाँ बिखरी पड़ी थीं। वह बोला – “इस मीलों लंबे समुद्रतट पर न जाने कितनी मछलियाँ पड़ी हुई हैं। इसतरह कुछेक को पानी में वापस डाल देने से तुम्हें क्या मिल जाएगा? इससे क्या फर्क पड़ जायेगा?”
युवक ने शान्ति से आदमी की बात सुनी, फ़िर उसने रेत पर झुककर एक और मछली उठाई और उसे आहिस्ता से पानी में फेंककर वह बोला :
आपको इससे कुछ मिले न मिले
मुझे इससे कुछ मिले न मिले
दुनिया को इससे कुछ मिले न मिले
लेकिन “इस मछली को सब कुछ मिल जाएगा”।

दोस्तों यह केवल सोच का ही फर्क है| सकारात्मक सोच (Positive thoughts) वाले व्यक्ति को लगता है कि उसके छोटे छोटे प्रयासों से किसी को बहुत कुछ मिल जायेगा लेकिन नकारात्मक सोच (Negative Thoughts) के व्यक्ति को यही लगेगा कि, यह समय की बर्बादी है?

अपने टेलेंट और स्किल को पहचानो

 आत्मसम्मान

एक बार की बात है किसी शहर में एक लड़का रहता था जो बहुत गरीब था। मेंहनत मजदूरी करके बड़ी मुश्किल से 2 वक्त का खाना जुटा पाता । एक दिन वह किसी बड़ी कंपनी में चपरासी के लिए इंटरव्यू देने गया । बॉस ने उसे देखकर उसे काम दिलाने का भरोसा जताया ।

जब बॉस ने पूछा -“तुम्हारी email id क्या है”? लड़के ने मासूमियत से कहा कि उसके पास email id नहीं है । ये सुनकर बॉस ने उसे बड़ी घृणा दृष्टि से देखा और कहा कि आज दुनिया इतनी आगे निकल गयी है , और एक तुम हो कि email id तक नहीं है , मैं तुम्हें नौकरी पर नहीं रख सकता ।

ये सुनकर लड़के के आत्मसम्मान को बहुत ठेस पहुंची , उसकी जेब में उस समय 50 रुपये थे । उसने उन 50 रुपयों से 1 किलो सेब खरीद कर वह अपने घर चलता बना। वह घर घर जाकर उन सेबों को बेचने लगा और ऐसा करके उसने 80 रुपये जमा कर लिए । अब तो लड़का रोज सेब खरीदता और घर घर जाकर बेचता ।

सालों तक यही सिलसिला चलता रहा लड़के की कठिन मेहनत रंग लायी और एक दिन उसने खुद की कंपनी खोली जहाँ से विदेशों में सेब सप्लाई किये जाते थे । उसके बाद लड़के ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और जल्दी ही बहुत बड़े पैमाने पर अपना बिज़नेस फैला दिया और एक सड़क छाप लड़का बन गया अरबपति ।
एक कुछ मीडिया वाले लड़के का इंटरव्यू लेने आये और अचानक किसी ने पूछ लिया – “सर आपकी email id क्या है”?? लड़के ने कहा -“नहीं है “, ये सुनकर सारे लोग चौंकने लगे कि एक अरबपति आदमी के पास एक “email id” तक नहीं है । लड़के ने हंसकर जवाब दिया -“मेरे पास email id नहीं है इसीलिए मैं अरबपति हूँ , अगर email id होती तो मैं आज एक चपरासी होता”।

मित्रों ,इसीलिए कहा जाता है कि हर इंसान के अंदर कुछ ना कुछ खूबी जरूर होती है, भीड़ के पीछे भागना बंद करो और अपने टेलेंट और स्किल को पहचानो । दूसरों से अपनी तुलना मत करो कि उसके पास वो है मेरे पास नहीं है , जो कुछ तुम्हारे पास है उसे लेकर आगे बढ़ो फिर दुनियां की कोई ताकत तुम्हें सफल होने से नहीं रोक सकती


Wednesday, August 26, 2015

संसार को मत बदलो


संसार को मत बदलो एक बार की बात है क राजा था जो कि एक समृद्ध राज्य का संचालन करता था। एक दिन वह अपने राज्य के
दूर दराज इलाकों का दौरा करने के लिए गया।
जब वह अपने महल में वापस लौटा, उसे अपने पैरों में बहुत दर्द महसूस हुआ क्यों कि इतनी लम्बी यात्रा
पर वह पहली बार गया था और उसकी यात्रा का मार्ग काफ़ी उबड़-खाबड़ था। उसने आदेश पारित किया कि
सम्पूर्ण राज्य के सभी मार्गों को चमड़े से पाट दिया जाये जिससे कि यदि वह भविष्य में कभी कहीं जाये तो
उसके पैरों में कष्ट न हो।
किन्तु, उसके इस आदेश का पालन हो पाना इतना आसान न था। इसके लिए हजारों गायों/भैसों की खाल की
आवश्यकता थी, अतः यह काम बहुत खर्चे वाला था।
यह देखकर राजा के एक समझदार मंत्री ने बड़ी हिम्मत जुटा कर उसे सुझाव दिया, " महाराज ! आपको सारे

मार्गों पर चमड़ा बिछा कर इतना अधिक खर्चा करने की क्या आवश्यकता है ?
आप चमड़े का एक टुकड़ा काट कर केवल अपने पैरों पर क्यों नहीं पहन लेते ? "
पहले तो राजा को उसका सुझाव अजीब सा लगा किन्तु, बाद में राजा मान गया और उसने अपने पैरों के लिए
एक चमड़े का खोल या 'जूता' बनवा लिया और उस मंत्री को पुरस्कृत किया।
इस कहानी में एक महत्वपूर्ण सन्देश है और वह यह है कि इस संसार में सुख से रहने का मूलमंत्र है कि 
संसार को बदलने का प्रयास न करो बल्कि स्वयं को बदल डालो। 

काँच की बरनी और दो कप चाय

जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दीजल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है , और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं , उस समय ये बोध कथा , ” काँच की बरनी और दो कप चायहमें याद आती है