Sunday, September 13, 2015

जिंदगी में सफलता

यह बात महायुद्ध के दिनों की है जब एक व्यवसायी ने अपने व्यापार में हुए घाटे की वजह से निराश होकर व्यापार बंद करने का निर्णय ले लिया था | इसी निराशा से पीड़ित वह व्यापारी एक दिन एक पार्क में चिंताग्रस्त बैठा था | तभी वहाँ शराब के नशे में लड़खड़ाता एक भिखारी भी आ पहुंचा | भिखारी उस व्यापारी के पास आकर बैठ गया | उस व्यापारी ने भिखारी की इस बुरी हालत के बारे में पूछा की उसकी इस हालत का कारण क्या है ? उस भिखारी ने अपनी दुरावस्था और बर्बादी के बारे में बताया की वह एक पढ़ा-लिखा नवयुवक है | आज से कुछ ही दिनों पूर्व वह एक व्यापारी था | व्यापार में असफल हो जाने के कारण वह निराश हो गया और अपने गम को दूर करने के लिए शराब पीने लगा | भिखारी ने कहा – मैंने समझा की शराब पीने से शायद मेरी खोई हुई शक्तियाँ वापस मिल जायेंगी | अतः मैं शराब पीने लगा | पहले मुझे लगा की मुझमे उत्साह का संचार हो गया है | इसी के साथ मुझको शराब पीने की आदत ही पड़ गयी | परिणाम यह हुआ की मेरी सभी शक्तियाँ नष्ट हो गयी | मैं बार बार इस दुर्व्यसन को छोड़ने का प्यास करता था ,लेकिन मैं शराब नही छोड़ सका |जिसके कारण आज मेरी यह हालत हो गयी है | मैं जीवन के प्रति निराश हूँ ,अब मेरा कोई भविष्य नही है |
उस व्यापारी के समीप से और उसके प्रश्न करने से वह भिखारी इतना तो भांप गया था की प्रश्नकर्ता स्वयं किसी निराशा से पीड़ित है | इसलिए अपने बारे मैं बताने के बाद उसने प्रश्नकर्ता से पूछ लिया की “आप किस चिंता से पीड़ित है |” व्यापारी ने बता दिया की –“मेरा व्यापार नष्ट हो गया है और मैं सोच रहा हूँ की अब क्या करूँ ?
भिखारी ने उसकी और देखकर कहा –“क्या तुम यह नही जानते की मेरी अपेक्षा तुम कितने धनवान हो ? तुम्हारे पास स्वास्थ है ,शक्ति है और अभी तुम युवक हो | तुम्हे जीवन की सभी सुविधाए प्राप्त है | तब उस निराश व्यापारी ने कहा हाँ वो तो है | तब भिखारी कहता है की जीवन के मूल्यों को समझो और निराशा त्याग दो | तुम्हारी शक्तियाँ को आज निराशा ने ढँक लिया है | मित्र ! उठो और याद रखो की सफलता गिरने में नही ,वल्कि गिरकर उठने में है |
जीवन के मूल्य को समझो और निराशा छोड़ दो |”भिखारी के ऐसे प्रेरक शब्द सुनकर व्यापारी बड़ा प्रभावित हुआ | वह अपने मन में सोचने लगा – यह व्यक्ति जो बर्बाद हो चुका है ,यदि वह भी अपने जीवन को इतनी आशा से देख सकता है, तो मेरे जीवन में तो अभी बहुत सी आशा शेष है |वह व्यापारी एक नयी आशा और उत्साह लेकर पार्क से लौट आया और पुनः अपने व्यापार में उत्साह के साथ जुट गया | आज वह एक सफल व्यापारी है और सभी तरह से प्रसन्न है | वह बताता है की “मेरी इस सफलता का रहस्य उस भिखारी की प्रेरणा ही है ,जिसने मुझे नए जीवन को शुरू करने को प्रेरित किया | उस भिखारी ने मुझे उस समय उत्साहित किया ,जब मैं जीवन के प्रति निराश हो गया था |”

हम सभी के जीवन में एक ऐसा समय आता है जब हमें लगता है की सब कुछ खत्म हो गया लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों में भी जो अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अडिग खड़ा होता है वही इस जिंदगी में सफलता को प्राप्त करता है |

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