Showing posts with label story. Show all posts
Showing posts with label story. Show all posts

Sunday, November 26, 2017

मार्केट में सन्नाटा

बीकानेर का मशहूर बाजार है..
कोट गेट ।।
शाम के 5 बजे बाजार भीड़ से भरा हुआ था। इसी भीड़ में पति-पत्नी एक दूसरे से लड़ने में व्यस्त थे और लगभग 200 लोग उनके इस तमाशे का मज़ा ले रहे थे,कुछ इसका वीडियो बनाने में लगे थे।
बात कुछ यूँ थी कि पत्नी जिद कर रही थी अपने पति से कि आज आप कार खरीद ही लीजीये मैं थक गई हूं आपकी मोटर साइकिल पर बैठ बैठ कर।
पति ने कहा....... ओए पागल औरत तमाशा ना बना मेरा दुनिया के सामने। मोटर साइकिल की चाभी मुझे दे।
पत्नी- नहीं, तुम्हारे पास इतना पैसा है । आज कार लोगे तो ही घर जाऊंगी।
पति-"अच्छा तो ले लुँगा अब चाभी दो"
पत्नी - नहीं दूंगी।
पति- "अच्छा ना दो मैं ताला ही तोड़ देता हूँ"
पत्नी ने कहा.... तोड़ दो लेकिन ना चाभी मिलेगी ना में साथ जाऊँगी ।
पति - "अच्छा तो ये ले मैं ताला तोड़ने लगा हूँ जाओ तुम्हारी मर्ज़ी मेरे घर ना आना"
पत्नी - जाओ जाओ नहीं आती तुम जैसे कंजूस के घर।
पति ने लोगों की मदद से मोटरसाइकिल का ताला खोल लिया, अपनी बाइक पर बैठ गया और बोला, "तुम आती हो या मैं जाऊँ"
वहाँ खड़े लोगों ने पत्नी को समझाया - चली जाओ इतनी सी बात पर अपना घर न खराब करो।
फिर पत्नी ने पति से वादा लिया कि वह बाइक बेचकर जल्द ही कार लेगा। दोनों की सुलह हो गयी और दोनों चले गए।
अच्छी कहानी है न
लेकिन अभी ख़त्म नहीं हुई है
तो जनाब.........
ठीक आधे घंटे बाद उसी जगह पर फिर से भीड़ लगी थी।
एक बंदा शोर कर रहा था........
कोई मेरी मोटरसाइकिल दिन दहाडे चुरा कर ले गया।
उसके बाद पूरे मार्केट में सन्नाटा😜😜😝😂😂

Friday, November 24, 2017

जिन्दगी अपनी शुरुआत के साथ अनिश्चितता लिए होती है



जिन्दगी अपनी शुरुआत के साथ अनिश्चितता लिए होती है हम कभी भी कुछ निश्चित नहीं कह सकते हमारे साथ क्या घटना पेश आ सकती है और असल में जीने का यही तो मजा है क्योंकि नहीं तो नयापन क्या रह जायेगा जिन्दगी में |

यही वजह है कि जब भी हम मुश्किल में होते है हमे लगता है अब तो शायद कुछ नहीं बदलेगा और जिन्दगी में उलझनों और समस्याओं की जगह हम अपनी सोच में अधिक उलझने पैदा कर लेती है जबकि जिन्दगी की परेशानियों से तो फिर भी पार पायी जा सकती है लेकिन हम अपने दिमाग में जो धारणाएं बनते है उनकी नकारात्मक Energy हमारी जीवन को प्रभावित करती है और वो भी बड़े बुरे स्तर पर |



ओशो ने एक बड़ी अच्छी बात कही है ” प्रकृति बाधा नहीं है क्योंकि प्रकृति तो एक संगीत है एक हारमनी जो निरंतर चलायमान होने का प्रतीक है जबकि मुश्किलें कई बार केवल इसलिए आती है कि वो हमारे अंदर सुप्त हमारी काबिलियत को जगा सके एक नयी दिशा दे सके ”

इसी तरह जीवन मुश्किलों और खुशियों से भरा एक सामजस्य पूर्ण प्लेटफार्म है जिसे आपको इसकी परिपूर्णता में बड़े अच्छे ढंग से जीना होता है वही जिन्दगी की परिभाषा है  | सोचिये अगर मुश्किलें ही नहीं होंगी तो नयापन क्या रहेगा  | हम ऐसा क्या कर सकते है उस दशा में कोई क्रांति भरा जो हमे सफलता का मज़ा दे  | नहीं न  | तो जरुरी है कि आप उस दौर से गुजरे जिसमे आपको लगे कि ऐसा क्या है मुझ में जो मैं बेहतर कर सकता हूँ अपने लिए और उसके बाद आप पाएंगे कि सफलता के उस मुकाम से आप कभी दूर नहीं थे बस एक direction आपको चाहिए थी जो आपको आपकी निराशा भरी जिन्दगी से वापिस लौटने का सबसे करीबी दरवाजा थी  |

आप कभी अपनी जरूरतों के दूसरे लेवल तक नहीं जाते जिनकी आपको अपने जीवन में वाकई जरुरत है और जिनसे आपकी खुशिया है आप लोगो के नजरिये से खुद को देखते है और असल में यही है जो परेशानी का कारण बनती है हो सकता है आप लोगो की नजर में सफल नहीं हो लेकिन जरा सोचिये क्या इस से वाकई कोई फर्क पड़ता है  | जवाब है नहीं लेकिन अगर आप सोचते है कि इस से पड़ता है तो मैं आपको एक बात साफ़ कर देना चाहता हूँ कि ऐसे में आप खुद की क्षमताओं को भी कम आंकते है  |

किसी भी परेशानी की स्थिति में जडवत बने रहने से अच्छा है आप जिस परेशानी में अभी है उसके बारे में सकारात्मक तरीके से विचार किया जाये नहीं तो आप एक काम कर सकते है एक पेन और पेपर लेकर बैठे और उन बातों पर विचार करें जो आपके पक्ष में मौजूद है और आप पाएंगे कि ऐसे कई छोटे छोटे रस्ते उपलब्ध है जो आपके लिए आपकी मंजिल के बड़े रस्ते तक जाते है बस जरुरत है एक फैसला भर लेने कि आप उन पर अमल करने के लिए कितने तेयार है क्योंकि कुछ भी नहीं करने से अच्छा है कुछ भी करें फिर चाहे जरुरी नहीं वो आपको एकदम से सफलता की और आपका कदम साबित हो ऐसे में आप अपनी गलतियों को सुधारने के लिए हर कदम पर तेयार हो सकते है क्योंकि आपकी छोटी छोटी गलतियाँ ही वो है जो आपको आपकी सफलता के रास्ते में आने वाली रुकावटों में बड़ी गलतियों की संभावनाओं को कम करती है इसलिए आपको अपने दिल और दिमाग से सकारात्मक सोच लिए धीरे धीरे आगे बढे तो आप पाएंगे जल्दी ही जिन्दगी के निराश पहलू से आप काफी आगे निकल चुके है 

Thursday, November 23, 2017

उसे तुम कल्पना की रस्सी से बांधो

एक व्यापारी था जिसके पास उसके अपने पांच ऊँट थे जिन पर सामान लादकर वो शहर शहर घूमता और कारोबार करता था और अपना व्यापार किया करता था | एक बार लौटते हुए रात हो गयी | तो वो रात को आराम करने के लिए एक सराय में रुका और और पेड़ोसे ऊँट को बाँधने की  तैयारी करने लगा | चार ऊँट तो बांध गये लेकिन पांचवे के लिए रस्सी कम पड़ गयी |

उसने जब कोई उपाय और नहीं सूझा तो सराय में मालिक से सहायता मांगने की सोची वो सराय के अंदर जा ही रहा था कि उसे गेट के बाहर एक फ़कीर मिला जिसने व्यापारी से पुछा कि ‘तुम कुछ परेशान लग रहे हो बताओ क्या परेशानी है हो सकता है मैं तुम्हारी कुछ मदद कर पाऊं ‘ व्यापारी ने उसे अपनी समस्या बतलाई तो वो बड़े जोर जोर से हसा और फ़कीर ने कहा कि पांचवे ऊँट को भी ठीक उसी तरह बांध दो जिस तरीके से तुमने बाकि के ऊँटो को बांधा है | फकीर के ये कहने पर व्यापारी ने थोडा खीजकर और हैरान होकर कहा लेकिन ‘रस्सी है कन्हा ?” इस पर फ़कीर ने कहा उसे तुम कल्पना की रस्सी से बांधो | व्यापारी ने ऐसा ही किया और उसने ऊँट के गले में अभिनय करते हुए काल्पनिक रस्सी का फंदा डालने जैसा व्यवहार किया और उसका दूसरा सिरा पेड़ से बांध दिया | ऐसा करते ही ऊँट बड़े आराम से बैठ गया|
व्यापारी चला गया सराय के अंदर और जाकर बड़े आराम से बेफिक्री की नींद सोया सुबह उठा और चलने की तयारी करी तो उसने बाकि के ऊँटो को खोला तो सारे ऊँट खड़े हो गये और चलने को तैयार हो गया लेकिन पांचवे ऊँट को हांकने के बाद भी वो खड़ा नहीं हुआ इस पर व्यापारी  गुस्से में आकर उसे मारने लगा लेकिन फिर भी ऊँट नहीं उठा इतने में कल वाला फ़कीर आया तो उसने कहा पागल इस बेजुबान को क्यों मार रहे हो अब | कल तुम ये बैठ नहीं रहा था तो परेशान थे और आज जब ये आराम से बैठा है तो भी तुमको परेशानी है इस पर व्यापारी ने कहा पर महाराज मुझे जाना है | फ़कीर ने कहा इसे खोलोगे तभी उठेगा न इस पर व्यापारी ने कहा मैंने कौनसा इसे बाँधा था मेने तो केवल बंधने का नाटक भर किया था तो फ़कीर कहने लगा जैसे कल तुमने इसे बाँधने का नाटक किया था वैसे ही अब खोलने केलिए भी नाटक करो | व्यापारी ने ऐसी ही किया और पलभर में ऊंट खड़ा हो गया | अब फ़कीर ने पते की बात बोली कि जिस तरह ये ऊंट अदृश्य रस्सियों से बंधा है उसी तरह लोग भी पुरानी रुढियों से बंधे है और आगे बढ़ना नहीं चाहते है जबकि परिवर्तन प्रकृति का नियम है और इसलिए हमे रुढियों के विषय में ना सोचकर अपनी और अपने अपनों की खुशियों के बारे में सोचकर कभी कभी जिन्दगी के कुछ ऐसे नियम जो हमने नहीं बनाये है और उनके होने का औचित्य नहीं है


Featured Post

प्रेरणादायक अनमोल वचन

जब आप कुछ गँवा बैठते है ,तो उससे प्राप्त शिक्षा को ना गवाएं बल्कि उसके द्वारा प्राप्त शिक्षा का भविष्य में इस्तेमाल करें | – दलाई लामा ज...