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Friday, November 24, 2017

जिन्दगी अपनी शुरुआत के साथ अनिश्चितता लिए होती है



जिन्दगी अपनी शुरुआत के साथ अनिश्चितता लिए होती है हम कभी भी कुछ निश्चित नहीं कह सकते हमारे साथ क्या घटना पेश आ सकती है और असल में जीने का यही तो मजा है क्योंकि नहीं तो नयापन क्या रह जायेगा जिन्दगी में |

यही वजह है कि जब भी हम मुश्किल में होते है हमे लगता है अब तो शायद कुछ नहीं बदलेगा और जिन्दगी में उलझनों और समस्याओं की जगह हम अपनी सोच में अधिक उलझने पैदा कर लेती है जबकि जिन्दगी की परेशानियों से तो फिर भी पार पायी जा सकती है लेकिन हम अपने दिमाग में जो धारणाएं बनते है उनकी नकारात्मक Energy हमारी जीवन को प्रभावित करती है और वो भी बड़े बुरे स्तर पर |



ओशो ने एक बड़ी अच्छी बात कही है ” प्रकृति बाधा नहीं है क्योंकि प्रकृति तो एक संगीत है एक हारमनी जो निरंतर चलायमान होने का प्रतीक है जबकि मुश्किलें कई बार केवल इसलिए आती है कि वो हमारे अंदर सुप्त हमारी काबिलियत को जगा सके एक नयी दिशा दे सके ”

इसी तरह जीवन मुश्किलों और खुशियों से भरा एक सामजस्य पूर्ण प्लेटफार्म है जिसे आपको इसकी परिपूर्णता में बड़े अच्छे ढंग से जीना होता है वही जिन्दगी की परिभाषा है  | सोचिये अगर मुश्किलें ही नहीं होंगी तो नयापन क्या रहेगा  | हम ऐसा क्या कर सकते है उस दशा में कोई क्रांति भरा जो हमे सफलता का मज़ा दे  | नहीं न  | तो जरुरी है कि आप उस दौर से गुजरे जिसमे आपको लगे कि ऐसा क्या है मुझ में जो मैं बेहतर कर सकता हूँ अपने लिए और उसके बाद आप पाएंगे कि सफलता के उस मुकाम से आप कभी दूर नहीं थे बस एक direction आपको चाहिए थी जो आपको आपकी निराशा भरी जिन्दगी से वापिस लौटने का सबसे करीबी दरवाजा थी  |

आप कभी अपनी जरूरतों के दूसरे लेवल तक नहीं जाते जिनकी आपको अपने जीवन में वाकई जरुरत है और जिनसे आपकी खुशिया है आप लोगो के नजरिये से खुद को देखते है और असल में यही है जो परेशानी का कारण बनती है हो सकता है आप लोगो की नजर में सफल नहीं हो लेकिन जरा सोचिये क्या इस से वाकई कोई फर्क पड़ता है  | जवाब है नहीं लेकिन अगर आप सोचते है कि इस से पड़ता है तो मैं आपको एक बात साफ़ कर देना चाहता हूँ कि ऐसे में आप खुद की क्षमताओं को भी कम आंकते है  |

किसी भी परेशानी की स्थिति में जडवत बने रहने से अच्छा है आप जिस परेशानी में अभी है उसके बारे में सकारात्मक तरीके से विचार किया जाये नहीं तो आप एक काम कर सकते है एक पेन और पेपर लेकर बैठे और उन बातों पर विचार करें जो आपके पक्ष में मौजूद है और आप पाएंगे कि ऐसे कई छोटे छोटे रस्ते उपलब्ध है जो आपके लिए आपकी मंजिल के बड़े रस्ते तक जाते है बस जरुरत है एक फैसला भर लेने कि आप उन पर अमल करने के लिए कितने तेयार है क्योंकि कुछ भी नहीं करने से अच्छा है कुछ भी करें फिर चाहे जरुरी नहीं वो आपको एकदम से सफलता की और आपका कदम साबित हो ऐसे में आप अपनी गलतियों को सुधारने के लिए हर कदम पर तेयार हो सकते है क्योंकि आपकी छोटी छोटी गलतियाँ ही वो है जो आपको आपकी सफलता के रास्ते में आने वाली रुकावटों में बड़ी गलतियों की संभावनाओं को कम करती है इसलिए आपको अपने दिल और दिमाग से सकारात्मक सोच लिए धीरे धीरे आगे बढे तो आप पाएंगे जल्दी ही जिन्दगी के निराश पहलू से आप काफी आगे निकल चुके है 

Sunday, September 13, 2015

कर्म का महत्व

एक बार बुद्ध एक गांव में अपने किसान भक्त के यहां गए। शाम को किसान ने उनके प्रवचन का आयोजन किया। बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन वह भक्त ही कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। गांव के लोगों में कानाफूसी होने लगी कि कैसा भक्त है कि प्रवचन का आयोजन करके स्वयं गायब हो गया। प्रवचन खत्म होने के बाद सब लोग घर चले गए। रात में किसान घर लौटा। बुद्ध ने पूछा, कहां चले गए थे? गांव के सभी लोग तुम्हें पूछ रहे थे।

किसान ने कहा, दरअसल प्रवचन की सारी व्यवस्था हो गई थी, पर तभी अचानक मेरा बैल बीमार हो गया। पहले तो मैंने घरेलू उपचार करके उसे ठीक करने की कोशिश की, लेकिन जब उसकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी तो मुझे उसे लेकर पशु चिकित्सक के पास जाना पड़ा। अगर नहीं ले जाता तो वह नहीं बचता। आपका प्रवचन तो मैं बाद में भी सुन लूंगा। अगले दिन सुबह जब गांव वाले पुन: बुद्ध के पास आए तो उन्होंने किसान की शिकायत करते हुए कहा, यह तो आपका भक्त होने का दिखावा करता है। प्रवचन का आयोजन कर स्वयं ही गायब हो जाता है।

बुद्ध ने उन्हें पूरी घटना सुनाई और फिर समझाया, उसने प्रवचन सुनने की जगह कर्म को महत्व देकर यह सिद्ध कर दिया कि मेरी शिक्षा को उसने बिल्कुल ठीक ढंग से समझा है। उसे अब मेरे प्रवचन की आवश्यकता नहीं है। मैं यही तो समझाता हूं कि अपने विवेक और बुद्धि से सोचो कि कौन सा काम पहले किया जाना जरूरी है। यदि किसान बीमार बैल को छोड़ कर मेरा प्रवचन सुनने को प्राथमिकता देता तो दवा के बगैर बैल के प्राण निकल जाते। उसके बाद तो मेरा प्रवचन देना ही व्यर्थ हो जाता। मेरे प्रवचन का सार यही है कि सब कुछ त्यागकर प्राणी मात्र की रक्षा करो। इस घटना के माध्यम से गांव वालों ने भी उनके प्रवचन का भाव समझ लिया।

Friday, September 11, 2015

व्यक्ति की महानता उसके चरित्र और ज्ञान पर निर्भर करती हैं


एक छोटी सी झोपड़ी थी, उसी में रहते थे और भिक्षा माँगकर जो मिल जाता उसी से अपना जीवन यापन करते थे|
एक बार वह पास के किसी गाँव में भिक्षा माँगने गये, उस समय उनके कपड़े बहुत गंदे थे और काफ़ी जगह से फट भी गये थे|
जब उन्होने एक घर का दरवाजा खटखटाया तो सामने से एक व्यक्ति बाहर आया, उसने जब पंडित को फटे चिथड़े कपड़ों में देखा तो उसका मन घ्रणा से भर गया और उसने पंडित को धक्के मारकर घर से निकाल दिया, बोला- पता नहीं कहाँ से गंदा पागल चला आया है|
पंडित दुखी मन से वापस चला आया, जब अपने घर वापस लौट रहा था तो किसी अमीर आदमी की नज़र पंडित के फटे कपड़ों पर पड़ी तो उसने दया दिखाई और पंडित को पहनने के लिए नये कपड़े दे दिए|
अगले दिन पंडित फिर से उसी गाँव में उसी व्यक्ति के पास भिक्षा माँगने गया| व्यक्ति ने नये कपड़ों में पंडित को देखा और हाथ जोड़कर पंडित को अंदर बुलाया और बड़े आदर के साथ थाली में बहुत सारे व्यंजन खाने को दिए| पंडित जी ने एक भी टुकड़ा अपने मुँह में नहीं डाला और सारा खाना धीरे धीरे अपने कपड़ों पर डालने लगे और बोले- ले खा और खा|
व्यक्ति ये सब बड़े आश्चर्य से देख रहा था, आख़िर उसने पूछ ही लिया कि- पंडित जी आप यह क्या कर रहे हैं सारा खाना अपने कपड़ों पर क्यूँ डाल रहे हैं|
पंडित जी ने बहुत शानदार उत्तर दिया- क्यूंकी तुमने ये खाना मुझे नहीं बल्कि इन कपड़ों को दिया है इसीलिए मैं ये खाना इन कपड़ों को ही खिला रहा हूँ, कल जब में गंदे कपड़ों में तुम्हारे घर आया तो तुमने धक्के मारकर घर से निकाल दिया और आज तुमने मुझे साफ और नये कपड़ों में देखकर अच्छा खाना पेश किया| असल में तुमने ये खाना मुझे नहीं, इन कपड़ों को ही दिया है, वह व्यक्ति यह सुनकर बहुत दुखी हुआ|
मित्रों, किसी व्यक्ति की महानता उसके चरित्र और ज्ञान पर निर्भर करती हैं पहनावे पर नहीं| अच्छे कपड़े और गहने पहनने से इंसान महान नहीं बनता उसके लिए अच्छे कर्मों की ज़रूरत होती है| यही इस कहानी की प्रेरणा है|

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कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद !

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