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Sunday, September 13, 2015

प्रेरणादायक अनमोल वचन

जब आप कुछ गँवा बैठते है ,तो उससे प्राप्त शिक्षा को ना गवाएं बल्कि उसके द्वारा प्राप्त शिक्षा का भविष्य में इस्तेमाल करें | – दलाई लामा

जल्दी सोचो,आगे सोचो, बड़ा सोचो क्योंकि विचारों पर किसी का एकाधिकार नही है |

बाधाएँ वे ऐसी डरावनी चीजें है जो आपको तब दिखती है जब आपका ध्यान आपके लक्ष्य पर नही होता | – हेनरी फोर्ड

असफलता मात्र फिर से कार्यारम्भ करने का अवसर होती है ,इस बार और अधिक बुद्धिमत्ता से – हेनरी फोर्ड

यदि आप अपनी प्रतिष्ठा का सम्मान करतें है तो अच्छे गुणों से संपन्न लोगों के साथ जुडिये, क्योंकि बुरी संगत में रहने से अच्छा अकेले रहना है |

जिसने सीखना बंद कर दिया समझिए वो बूढा हो गया ,चाहे वो 20 साल का हो या 80 साल का | केवल जो सीख रहा है ,वो युवा है | – हेनरी फोर्ड

आलसी व्यक्ति का ना कोई वर्तमान है और ना ही कोई भविष्य |

बिना साहस के आप इस दुनिया में कुछ भी नही करेंगे, प्रतिष्ठा के बाद साहस ही दिमाग की महानतम विशेषता है | – अरस्तु

हजारों खोखले शब्दों से अच्छा वह एक शब्द है जो शान्ति लाए | – गौतम बुद्ध

वो व्यक्ति जिसका ज्ञान बस किताबों तक सीमित है और जिसका धन दूसरों के कब्जे में है ,वो जरूरत पड़ने पर ना अपने ज्ञान का प्रयोग कर सकता है और ना ही अपने धन का | – चाणक्य

दुनिया में अक्सर वो लोग बदलाब लाते है जिन्हें दुनिया कुछ बदलने लायक नही समझती |

शिक्षक कभी भी साधारण नही होता प्रलय और निर्माण उसकी गोद में ही पलते हैं | – आचार्य चाणक्य

संघर्ष में आदमी अकेला होता है ..वहीँ सफलता में दुनिया उसके साथ होती है ..जब जब जग उस पर हंसा है तब तब उसी ने इतिहास रचा है ..

जिंदगी में शान्ति से जीने के केवल 2 ही तरीके है |
1. माफ कर दो उनको जिनको तुम भुला नही सकते |
2.भूल जाओ उनको जिनको तुम माफ नही कर सकते |

उपलब्धि और आलोचना एक दूसरे की मित्र है ,उपलब्धियाँ बढेंगी तो निश्चित ही आलोचना भी बढेगी |

समस्या को हल करने की तुलना में अधिकतर लोग ज्यादा समय और ताकत उस से जूझने में लगा देते है | – हेनरी फोर्ड

इस मिट्टी में कुछ ना कुछ तो अनूठा है , जो कई बाधाओं के बाबजूद हमेशा महान लोगों की जन्मभूमि है | – बल्लभ भाई पटेल



जो व्यक्ति सब कुछ स्वयं करना चाहता है और उसका श्रेय भी खुद लेना चाहता है वह एक अच्छा नेता कभी नही बन सकता | – Andrew Carnegie

अगर आप अच्छे घुड़सवार बनना चाहते है तो सबसे बेकाबू घोड़े को चुनिए क्योंकि अगर आप इसे काबू में कर लेते ही तो आप हर घोड़े को काबू में कर सकते है | – सुकरात

अगर आप उड़ नही सकते तो दौडिए ,अगर दौड नही सकते तो चलिए ,अगर चल भी नही सकते तो रेंगिये ,कुछ भी कीजिये बस रुकिए मत आंगे बढिए – मार्टिन लुथेर किंग

चरित्र का विकास आसानी से नही किया जा सकता ,केवल परिक्षण और पीड़ा के अनुभब से ही आत्मा को मजबूत महत्वाकांक्षा को प्रेरित और सफलता को हांसिल किया जा सकता है | – हेलेन केलर

जो भगवान के साथ चलते है ,वे हमेशा अपनी मंजिल पर पहुँच जाते हैं | – हेनरी फोर्ड

जितनी ज्यादा आप प्रवाह करोगे उतना ज्यादा आप के पास खोने के लिए होगा | – हैरी पॉटर

किसी और चीज की तुलना में ,डर ही लोगों के जीवन में सबसे ज्यादा हार का कारण बनता है – र व एमर्सन

बाहरी वेश-भूषा से व्यक्ति की सही पहचान नहीं हो सकती


एक नौजवान शिष्य अपने गुरु के पास पहुंचा और बोला , ” गुरु जी एक बात समझ नहीं आती , आप इतने साधारण वस्त्र क्यों पहनते हैं …इन्हे देख कर लगता ही नहीं कि आप एक ज्ञानी व्यक्ति हैं जो सैकड़ों शिष्यों को शिक्षित करने का महान कार्य करता है . अंगूठी गुरु जी मुस्कुराये . फिर उन्होंने अपनी ऊँगली से एक अंगूठी निकाली और शिष्य को देते हुए बोले , ” मैं तुम्हारी जिज्ञासा अवश्य शांत करूँगा लेकिन पहले तुम मेरा एक छोटा सा काम कर दो … इस अंगूठी को लेकर बाज़ार जाओ और किसी सब्जी वाले या ऐसे ही किसी दुकानदार को इसे बेच दो … बस इतना ध्यान रहे कि इसके बदले कम से कम सोने की एक अशर्फी ज़रूर लाना .” शिष्य फ़ौरन उस अंगूठी को लेकर बाज़ार गया पर थोड़ी देर में अंगूठी वापस लेकर लौट आया . “क्या हुआ , तुम इसे लेकर क्यों लौट आये ?”, गुरु जी ने पुछा . ” गुरु जी , दरअसल , मैंने इसे सब्जी वाले , किराना वाले , और अन्य दुकानदारों को बेचने का प्रयास किया पर कोई भी इसके बदले सोने की एक अशर्फी देने को तैयार नहीं हुआ …” गुरु जी बोले , ” अच्छा कोई बात नहीं अब तुम इसे लेकर किसी जौहरी के पास जाओ और इसे बेचने की कोशिश करो …” शिष्य एक बार फिर अंगूठी लेकर निकल पड़ा , पर इस बार भी कुछ ही देर में वापस आ गया . “क्या हुआ , इस बार भी कोई इसके बदले 1 अशर्फी भी देने को तैयार नहीं हुआ ?”, गुरूजी ने पुछा . शिष्य के हाव -भाव कुछ अजीब लग रहे थे , वो घबराते हुए बोला , ” अरररे … नहीं गुरु जी , इस बार मैं जिस किसी जौहरी के पास गया सभी ने ये कहते हुए मुझे लौटा दिया की यहाँ के सारे जौहरी मिलकर भी इस अनमोल हीरे को नहीं खरीद सकते इसके लिए तो लाखों अशर्फियाँ भी कम हैं …” “यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है ” , गुरु जी बोले , ” जिस प्रकार ऊपर से देखने पर इस अनमोल अंगूठी की कीमत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता उसी प्रकार किसी व्यक्ति के वस्त्रों को देखकर उसे आँका नहीं जा सकता .व्यक्ति की विशेषता जानने के लिए उसे भीतर से देखना चाहिए , बाह्य आवरण तो कोई भी धारण कर सकता है लेकिन आत्मा की शुद्धता और ज्ञान का भण्डार तो अंदर ही छिपा होता है। “ शिष्य की जिज्ञासा शांत हो चुकी थी . वह समझ चुका था कि बाहरी वेश-भूषा से व्यक्ति की सही पहचान नहीं हो सकती , जो बात मायने रखती है वो ये कि व्यक्ति भीतर से कैसा है !

विश्वास

एक बार एक अत्यंत गरीब महिला जो ईश्वरीय शक्ति पर बेइंतिहा विश्वास करती थी, एक बार अत्यंत ही विकट स्थिति में आ गई। कई दिनों से खाने के लिए पूरे परिवार को कुछ नहीं मिला।
एक दिन उसने रेडियो के माध्यम से ईश्वर को अपना सन्देश भेजा कि वह उसकी मदद करे।

यह प्रसारण एक नास्तिक ,घमण्डी और अहंकारी उद्योगपति ने सुना और उसने सोचा कि क्यों न इस महिला के साथ कुछ ऐसा मजाक किया जाये कि उसकी ईश्वर के प्रति आस्था डिग जाय।

उसने अपने सेक्रेटरी को कहा कि वह ढेर सारा खाना और महीने भर का राशन उसके घर पर देकर आ जाये और जब वह महिला पूछे किसने भेजा है तो कह देना कि " शैतान" ने भेजा है।

जैसे ही महिला के पास सामान पंहुचा पहले तो उसके परिवार ने तृप्त होकर भोजन किया । फिर वह सारा राशन अलमारी में रखने लगी।

जब महिला ने पूछा नहीं कि यह सब किसने भेजा है तो सेक्रेटरी से रहा नहीं गया और पूछा , आपको क्या जिज्ञासा नही होती कि यह सब किसने भेजा है।

उस महिला ने बेहतरीन जवाब दिया , मैं इतना क्यूँ सोचूँ या पूछूं, मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है, मेरे भगवान जब आदेश देते हैं तो शैतानों को भी उस आदेश का पालन करना पड़ता है !

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