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Monday, August 31, 2015

अपने टेलेंट और स्किल को पहचानो

 आत्मसम्मान

एक बार की बात है किसी शहर में एक लड़का रहता था जो बहुत गरीब था। मेंहनत मजदूरी करके बड़ी मुश्किल से 2 वक्त का खाना जुटा पाता । एक दिन वह किसी बड़ी कंपनी में चपरासी के लिए इंटरव्यू देने गया । बॉस ने उसे देखकर उसे काम दिलाने का भरोसा जताया ।

जब बॉस ने पूछा -“तुम्हारी email id क्या है”? लड़के ने मासूमियत से कहा कि उसके पास email id नहीं है । ये सुनकर बॉस ने उसे बड़ी घृणा दृष्टि से देखा और कहा कि आज दुनिया इतनी आगे निकल गयी है , और एक तुम हो कि email id तक नहीं है , मैं तुम्हें नौकरी पर नहीं रख सकता ।

ये सुनकर लड़के के आत्मसम्मान को बहुत ठेस पहुंची , उसकी जेब में उस समय 50 रुपये थे । उसने उन 50 रुपयों से 1 किलो सेब खरीद कर वह अपने घर चलता बना। वह घर घर जाकर उन सेबों को बेचने लगा और ऐसा करके उसने 80 रुपये जमा कर लिए । अब तो लड़का रोज सेब खरीदता और घर घर जाकर बेचता ।

सालों तक यही सिलसिला चलता रहा लड़के की कठिन मेहनत रंग लायी और एक दिन उसने खुद की कंपनी खोली जहाँ से विदेशों में सेब सप्लाई किये जाते थे । उसके बाद लड़के ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और जल्दी ही बहुत बड़े पैमाने पर अपना बिज़नेस फैला दिया और एक सड़क छाप लड़का बन गया अरबपति ।
एक कुछ मीडिया वाले लड़के का इंटरव्यू लेने आये और अचानक किसी ने पूछ लिया – “सर आपकी email id क्या है”?? लड़के ने कहा -“नहीं है “, ये सुनकर सारे लोग चौंकने लगे कि एक अरबपति आदमी के पास एक “email id” तक नहीं है । लड़के ने हंसकर जवाब दिया -“मेरे पास email id नहीं है इसीलिए मैं अरबपति हूँ , अगर email id होती तो मैं आज एक चपरासी होता”।

मित्रों ,इसीलिए कहा जाता है कि हर इंसान के अंदर कुछ ना कुछ खूबी जरूर होती है, भीड़ के पीछे भागना बंद करो और अपने टेलेंट और स्किल को पहचानो । दूसरों से अपनी तुलना मत करो कि उसके पास वो है मेरे पास नहीं है , जो कुछ तुम्हारे पास है उसे लेकर आगे बढ़ो फिर दुनियां की कोई ताकत तुम्हें सफल होने से नहीं रोक सकती


Wednesday, August 26, 2015

तांगा चालक अरबपति

महाशय धरमपाल हट्टी(M.D.H), आज ये नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है| “मसाला किंग”(M.D.H) के नाम से मशहूर महाशय जी आज सफलता की बुलंदियों पर हैं, लेकिन इस सफलता के पीछे एक बहुत सघर्ष भरी कहानी है|

इनका जन्म सियालकोट(जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था| ये एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते थे, परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी न थी| महाशय जी जब धीरे धीरे बड़े हुए तो स्कूल में दाखिला कराया ये बचपन से ही पढ़ाई में बहुत कमजोर थे पढ़ने लिखने में बिल्कुल मन नहीं लगता था| इनके पिता इनको बहुत समझाते लेकिन महाशय जी बिल्कुल भी पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते थे, इसी वजह से पाँचवी कक्षा में वो फेल हो गये और इसी के साथ उन्होनें स्कूल जाना भी छोड़ दिया| पिता ने इनको इसके बाद एक बढ़ई की दुकान पर काम सीखने के लिए भेज दिया| कुछ दिन बाद इनका मन बढ़ई के काम में नहीं लगा तो छोड़ दिया| धीरे धीरे समय आगे बढ़ता गया, इसी बीच महाशय जी 15 साल की उम्र तक करीब 50 काम बदल चुके थे| उन दिनों सियालकोट लाल मिर्च के लिए बहुत प्रसिद्ध था, यही सोचकर महाशय जी के पिताजी ने एक छोटी सी मसाले की दुकान करा दी धीरे धीरे व्यापार अच्छा बढ़ने लगा| लेकिन उन दिनों आज़ादी का आंदोलन अपने चरम पे था| 1947, में जब देश आज़ाद हुआ तो सियालकोट पाकिस्तान का हिस्सा बन चुका था और वहाँ रह रहे हिंदू असुरक्षा महसूस कर रहे थे और दंगे भी काफ़ी भड़क चुके थे इसी डर से उन्हें सियालकोट छोड़ना पड़ा| महाशय जी के अनुसार उन दिनों स्थिति बहुत भयावह थी, चारों तरफ मारामारी मची हुई थी| इन्हें भी अपना घर बार छोड़ कर भागना पढ़ा| बड़ी ही दिक्कत और मुश्किलों से वो नानक डेरा(भारत) पहुचे पर अभी वो शरणार्थी थे अपना सब कुछ लूट चुका था| इसके बाद स्पारिवार कई मीलों चलकर ये अमृतसर पहुचे| दिल्ली में इनके एक रिश्तेदार रहते थे, यही सोच कर महाशय जी करोलबाग देल्ही आ गये| उस समय उनके पास केवल 1500 रुपये थे कोई काम धंधा था नहीं| उन्होनें कुछ पैसे जुटाकर एक तांगा-घोड़ा खरीद लिया| और इस तरह वो बन गये एक तांगा चालक
किर्तिनगर में इन्होने पहली फैक्टरी लगाई और उस दिन के बाद महाशय जी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक पूरे विश्व भर में अपने कारोबार(Business) को फैलाया|आज .M.D.H. एक बड़ा ब्रांड बन चुका है और पूरे विश्व में फैला हुआ है| आज महाशय जी बहुत बड़े अरबपति उद्धयोग(Richest Business) के मलिक हैं|
महाशय जी की इस छवि से हटकर एक रूप और है वो है समाज सेवा| पूरे भारत में कई जगह उनके द्वारा संचालित विद्धयालय और अस्पताल हैं|
कहा जाता है क़ि “इंसान अपनी परिस्थितियों का नहीं अपने फ़ैसलों और कर्मों का परिणाम होता है”, ऐसा ही कुछ सीखने को मिलता है महाशय जी के जीवन से|
तो आओ मित्रों हम भी इस महान पुरुष के जीवन से प्रेरणा लेकर सफल बनने का प्रयास करते हैं

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प्रेरणादायक अनमोल वचन

जब आप कुछ गँवा बैठते है ,तो उससे प्राप्त शिक्षा को ना गवाएं बल्कि उसके द्वारा प्राप्त शिक्षा का भविष्य में इस्तेमाल करें | – दलाई लामा ज...