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Saturday, November 7, 2020

अद्भुत स्थापत्य कला

अकेला कर्नाटक में बेलूर का चेन्नकेशव मंदिर का स्थापत्य और मूर्तिकला इतनी उत्कृष्ट है कि कल्पना नही की जा सकती कि सचमुच हजार साल पहले भारत इस मामले में इतना विकसित रहा होगा।

सोचिए कि औरंगाबाद का कैलाश मन्दिर सिर्फ एक चट्टान से बना है। इसका निर्माण शिखर से शुरू होकर तहखाने तक हुआ।

भारत में एक से एक अद्भुत मन्दिर हैं लेकिन आज़ादी के बाद सांस्कृतिक,ऐतिहासिक संस्थाओं पर वामपंथियों का कब्जा हो गया,जो हिन्दू विरोधी थे,उन्होंने हिन्दू धर्म के प्रति अपनी घृणा के चलते इन्हें विश्व के सामने या देश के सामने आने नही दिया।


चेन्नकेशव मन्दिर बेलूर।


होयसालेश्वर मन्दिर हलेबीड़ू कर्नाटक।


कैलाशा मन्दिर,एलोरा महाराष्ट्र।

यह मंदिर एक ही चट्टान से बना है।


वेंकटेश्वर मन्दिर तिरुमला, आंध्र प्रदेश।


मीनाक्षी मन्दिर तमिलनाडु।


मीनाक्षी मन्दिर की बेहतरीन कलाकारी।


विरुपाक्ष मन्दिर हंपी।


चेन्नकेशव मन्दिर की मूर्तिकला।

यह भी


यह भी चेन्नकेशव मन्दिर की कारीगरी का नमूना है।


रामेश्वरम मंदिर।


हलेबीड़ू मन्दिर, कर्नाटका।

ये कुछ ही मन्दिर हैं जो अपनी अद्भुत मूर्तिकला के लिए जाने जाते हैं।

ऐसे हजारों मन्दिर हैं जो श्रद्धालुओं की नजरों से ओझल हुए हैं।

Friday, October 30, 2020

राव सीहा जी

 


राव सीहा जी राजस्थान में स्वतंत्र राठौड़ राज्य के संस्थापक थे | राव सीहा जी के वीर वंशज अपने शौर्य, वीरता एवं पराक्रम व तलवार के धनी रहे है |मारवाड़ में राव सीहा जी द्वारा राठौड़ साम्राज्य का विस्तार करने में उनके वंशजो में राव धुहड़ जी , राजपाल जी , जालन सिंह जी ,राव छाडा जी , राव तीड़ा जी , खीम करण जी ,राव वीरम दे , राव चुडा जी , राव रिदमल जी , राव जोधा , बीका , बीदा, दूदा , कानध्ल , मालदेव का विशेष क्रमबद्ध योगदान रहा है |

 इनके वंशजों में दुर्गादास व अमर सिंह जैसे इतिहास प्रसिद्ध व्यक्ति हुए| राव सिहा सेतराम जी के आठ पुत्रों में सबसे बड़े थे| !

चेतराम सम्राट के, पुत्र अस्ट महावीर !
जिसमे सिहों जेस्ठ सूत , महारथी रणधीर ||
राव सिहाँ जी सं. 1268 के लगभग पुष्कर की तीर्थ यात्रा के समय मारवाड़ आये थे उस मारवाड़ की जनता मीणों, मेरों आदि की लूटपाट से पीड़ित थी , राव सिहा के आगमन की सूचना पर पाली नगर के पालीवाल ब्राहमण अपने मुखिया जसोधर के साथ सिहा जी मिलकर पाली नगर को लूटपाट व अत्याचारों से मुक्त करने की प्रार्थना की| अपनी तीर्थ यात्रा से लौटने के बाद राव सिहा जी ने भाइयों व फलोदी के जगमाल की सहायता से पाली में हो रहे अत्याचारों पर काबू पा लिया एवं वहां शांति व शासन व्यवस्था कायम की, जिससे पाली नगर की व्यापारिक उन्नति होने लगी|

आठों में सिहाँ बड़ा ,देव गरुड़ है साथ |
बनकर छोडिया कन्नोज में ,पाली मारा हाथ ||

पाली के अलावा भीनमाल के शासक के अत्याचारों की जनता की शिकायत पर जनता को अत्याचारों से मुक्त कराया |

भीनमाल लिधी भडे,सिहे साल बजाय|
दत दीन्हो सत सग्रहियो, ओ जस कठे न जाय||

पाली व भीनमाल में राठौड़ राज्य स्थापित करने के बाद सिहा जी ने खेड़ पर आक्रमण कर विजय कर लिया| इसी दौरान शाही सेना ने अचानक पाली पर हमला कर लूटपाट शुरू करदी ,हमले की सूचना मिलते ही सिहा जी पाली से 18 KM दूर बिठू गावं में शाही सेना के खिलाफ आ डटे, और मुस्लिम सेना को खधेड दिया| वि. सं . 1330 कार्तिक कृष्ण दवादशी सोमवार को करीब 80 वर्ष की उमर में सिहा जी स्वर्गवास हुआ व उनकी सोलंकी रानी पार्वती इनके साथ सती हुई | 

सिहाजी की रानी (पाटन के शासक जय सिंह सोलंकी की पुत्री )से बड़े पुत्र आस्थान जी हुए जो पिता के बाद मारवाड़ के शासक बने | 

राव सिहं जी राजस्थान में राठौड़ राज्य की नीवं डालने वाले पहले व्यक्ति थे |

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